दुनिया अक्सर शोर भरी और भारी होती है। यह जगह उसके उलट है — एक छोटा, अपनापन भरा सहारा, जहाँ जब मन हो लौट आना: एक साँस के लिए, एक अच्छे ख़याल के लिए, एक मुस्कान के लिए।
इसलिए नहीं कि तुम दुनिया को भूल जाओ। बल्कि इसलिए कि तुम उससे फिर मिल सको।
यह जगह धीरे-धीरे बढ़ती है — जैसे हर वह चीज़, जिसे अच्छा बनना है। फिर आना, ज़रूर।