देना
तुम जो देखो और जो दो, वह घूमकर तुम्हारे पास लौट आता है।
ध्यान देना
इस वक़्त तुम किसके लिए शुक्रगुज़ार हो? कोई बहुत छोटी-सी बात भी।
तुम्हारा आसमान अभी अँधेरा है। पहली अच्छी बात पहला तारा जगा देती है।
आगे बढ़ाना
इस वक़्त तुम्हारा मन किसका भला चाहता है?
… और इसमें से थोड़ा-सा तुम्हारे लिए भी है।
किसी को भेजना चाहोगे?
जो तुम आगे बढ़ाते हो, वह यहाँ एक हल्के निशान की तरह रहता है — सिर्फ़ तुम्हारे पास।
क्या कोई ऐसा है, जिसे अभी इसकी ज़रूरत हो?
सब कुछ सिर्फ़ तुम्हारे डिवाइस पर रहता है — तुम्हारी अच्छी बातें और जिसका तुम ख़याल करते हो। कुछ भेजा नहीं जाता; जो तुम आगे बढ़ाते हो, वह तुम ख़ुद बढ़ाते हो।