साँस
मन हो तो साथ साँस लो। न हो तो बस देखते रहो।
हल्का
गहरा
साँस अंदर लेने पर आकृति बड़ी होती है, बाहर छोड़ने पर छोटी। न कोई मंज़िल, न गिनती — जितनी देर अच्छा लगे, ठहरो।
तुम्हारी सेटिंग में हलचल कम है — इसलिए आकृति विश्राम में है। अपनी रफ़्तार से साँस लो: धीरे अंदर, धीरे बाहर।
यह किसी इलाज की जगह नहीं लेता। यह बस साँस लेने की एक शांत जगह है।